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सूचना संचार साधनों के प्रयोग द्वारा
जनजातीय महिला - एक पथ प्रदर्शक


मीडिया लैब एशिया द्वारा सोची व कार्यान्वित एक योजना
  
 

किसी भी देश की प्रगति से अभिप्राय समाज के विभिन्न वर्गों के चहुँमुखी विकास से होता है। इसके लिये समाज के धनी व निर्धन वर्गों के बीच की खाई को पाटना आवश्यक है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की सामाजिक-आर्थिक खाई को पाटना ही होगा अगर एक समान समाज की रचना करनी है।

आज भी ऐसी कई समुदाय हैं जो कि काफी कम संसाधनों से अपना गुजारा करते हैं, जिनके पास जीवन-यापन के साधन काफी सीमित हैं। जनजातीय समुदाय भी एक ऐसा ही समुदाय है जिनके लिये अभी भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार सृजन और ऐसी ही दूसरी आधारभूत जरूरतों को पूरा करना एक चुनौती है। उदाहरणस्वरूप, कई प्राथमिक विद्यालय हैं लेकिन कुछ ही लडकियाँ हाई-स्कूल तक पहुँच पाती हैं। इसके अतिरिक्त, अपर्याप्त जलापूर्त्ति और जनजातीय समुदायों के पानी रखने के अस्वास्थ्यकर तरीकों के फलस्वरूप वे, खासकर उनके बच्चे कुछ सामान्य बीमारियाँ जैसे टॉयफॉयड, मलेरिया व पानी से होनेवाले अन्य रोगों से ग्रस्त रहते हैं। 

वास्तव में, विकास के फल इन जनजातियों के पास अभी पहुँचना बाकी है जो अभी भी सामाजिक, सांस्कृतिक व आर्थिक रूप से आदम मानवों की तरह रहते हैं। अतः जनजातीय समुदायों को सशक्त करना अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य व जीवन-यापन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर जोर देकर मुख्यधारा में लाना अवश्यक है।

 

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